Unusual experiment of mahatma gandhi( महात्मा गांधी के अश्लिन प्रयोग)

दोस्तों महात्मा गांधी को पूरे विश्व में शांति और उनकी अहिंसावादी सोच के लिए जाना जाता है लेकिन उनकी जिंदगी का एक ऐसा पहलू भी है जिसके बारे में इतिहास में काफी वर्णन मिलता है पर उसके बारे में कोई बात नहीं करना चाहता लेकिन आज हम उस विषय के बारे में बात करेंगे।
 गांधी जी की जिंदगी से जुड़ा हुआ वह पहलू है उनके द्वारा महिलाओं पर किये गए अस्लीन प्रयोग यूँ  तो गांधीजी ने 38 की उम्र में बह्मचर्य धारण कर लिया था अगर कोई व्यक्ति बह्मचर्य धारण कर लेता है तो उसे सारी काम भावना व शारारिक संबंधों को त्याग  कर साधारण सात्विक व आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करना होता है वह किसी भी महिला से कोई संबंध नहीं बना सकता।



गांधी जी को भी ऐसा ही करना था लेकिन इसका उन पर विपरीत प्रभाव दिखने लगा वह महिलाओं की उपस्थिति में असहज महसूस करने लगे थे। जिस कारण उन्होंने आश्रम की महिलाओं पर अजीबो-गरीब अश्लील प्रयोग करना शुरु कर दिया था।
 गांधीजी मसाज कराने की शौकीन थे और वह आश्रम में नग्न महिलाओं से मसाज करवाते थे और उन्हीं के साथ नग्न अवस्था में सोते थे
 ऐसा करने वालों मैं उनकी पौत्री मनु भी शामिल थी वे अपनी पौत्री के साथ नग्न होकर बिस्तर साझा करते थे बाद में उन्होंने यही प्रयोग  आश्रम के हर एक व्यक्ति पर शुरू कर दिया।
कहा जाता है आश्रम के पुरुषों को आश्रम की महिलाओं के साथ नग्न होकर सोने व नहाने  को कहा जाता था लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार की सेक्सुअल एक्टिविटी करने की इजाजत नही थी।
 अगर कोई  सेक्सुअल एक्टिविटी करते  पाया जाता तो उसे दंडित किया जाता था
किसी भी प्रकार की कामोत्तेजना होने पर उसको ठंडे पानी से नहाने के लिए कहा जाता था।
एक बार गांधीजी ने अपने अखबार  में लिखा था कि यह नौजवान भारतीय का कर्तव्य है  कि वह शादी ना करे  अगर किसी कारणवश वो ऐसा  करता है तो कम से कम अपनी पत्नी के साथ संबंध ना बनाएं।
 वल्लभभाई पटेल ने गांधी जी की इन प्रयोंगों को अनैतिक घोषित कर दिया था और नेहरू जी ने गांधी जी को कहा था कि जब तक  लोग आपकी  इस सोच  को भली भाति समझ ना ले तक तक आपको  मनु के साथ बिस्तर साझा नहीं करना चाहिए।

गांधीजी के बेहद करीबी सेकेट्ररी
 आर पी परशुराम ने गांधी जी  के इन प्रयोग को करीब से देखा वह गांधी जी को अपना आदर्श मानता था और गांधीजी का बेहद सम्मान करता था आश्रम मे आने के बाद उसने लिखा कि मेरी मन में गांधीजी के प्रति असीम सम्मान था लेकिन उन्होंने अपने प्रति मेरे इस सम्मान को अपने अजीबो-गरीब प्रयोगों की वजह से मेरे आश्रम में आने के महज 24 घण्टे मे ही खो दिया।
उसने 2 साल मे ही आश्रम से इस्तीफा दे दिया।
दोस्तों हम भारत के लोग अपने लीडर के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और ने अपनी कल्पना मैं उन्हें भगवान का दर्जा दे देतेे हैं जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है वे भी साधारण ही इंसान होते हैं महात्मा गांधी हमारे राष्ट्रपिता हैं उन्होंने बहुत महान काम किये जिस वजह से वे भारत मे ही नही पूरे विश्व मे पूजे जाते हैं

आशा करता हूं कि  आपको मेरा ये  प्रयास पसंद आया
धन्यवाद



  - @Mahavir singh (silent writer)









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