THE BLACK hole

दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं ब्लैक होल्स के बारे में जी हां ब्लैक होल शायद आप में से बहुत लोग इस बारे में जानते भी होंगे
जैसा कि इसका नाम सुनकर लगता है कि यह कोई काला छेद होगा लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है यह कोई काला छेद नहीं बल्कि ब्रह्मांड के अद्भुत अकल्पनीय दानव हैं जिनकी भूख कभी खत्म नहीं होती यह हमेशा कुछ ना कुछ खाते रहते 
दरअसल ब्लैक होल  इतने सघन आकाशीय पिंड हैं कि इनकी ग्रेविटी के आगे प्रकाश भी नहीं बच सकता अर्थात यह प्रकाश को भी खा जाते हैं यह उतने ही सघन होते हैं मानो पूरी पृथ्वी को दबाकर एक टेनिस बॉल का आकार दे दिया हो
अब यह पिंड इतनी ज्यादा सघन होते हैं तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि इनकी ग्रेविटी कितनी ज्यादा होगी दोस्तों पृथ्वी के मुकाबले इनकी ग्रेविटी लाखों-करोड़ों गुना ज्यादा होती है
एक ब्लैक होल का द्रव्यमान:-
                             ब्रह्मांड में जब भी कोई भारी चीज दिखती है तो उसे नापने के लिए हम अपने आसपास सबसे भारी चीज को ढूंढते हैं और हमारे आसपास सबसे भारी चीज है सूर्य तो हम एक ब्लैक होल का द्रव्यमान नापने के लिए उसे सूर्य  से तुलना करते जिसे सोलर मास कहते हैं एक सूर्य का जितना द्रव्यमान होता है उसे एक सोलर मास कहते हैं छोटे ब्लैक होल का द्रव्यमान लगभग 100 सोलर मास तक होता है
 एक मध्य आयु वाले ब्लैक होल का द्रव्यमान 100 से 1000 सोलर मांस के बराबर होता है और ऐसे ब्लैक होल भी होते हैं जिनका द्रव्यमान करोड़  सोलर मास के बराबर होता है दरअसल विज्ञानिक अभी तक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं की इतने बड़े ब्लैक होल बनते कैसे हैं
क्योंकि इतने बड़े ब्लैक होल बनने के लिए बहुत अधिक टाइम  चाहिए  लेकिन उतना समय अभी हमारे ब्रह्मांड को बने हुए नहीं हुआ है

ब्लैक होल का निर्माण;- तारों में लगातार नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया होती है और यह प्रक्रिया इतनी संतुलित अवस्था में होती है कि तारे के अंदर की ग्रेविटी उसके नाभिकीय बल को संतुलित करें रहती है और जैसे-जैसे तारे का ईंधन खत्म होने लगता है वैसे वैसे तारे की  प्रचंड ग्रेविटी उसके नाभिकीय बल पर हावी होते रहती है और तभी तारे का द्रव्यमान उसके केंद्र की ओर संकुचित होने लगता है तभी निर्माण होता है एक ब्लैक होल का इनकी ग्रेविटी इतनी प्रचंड होती है कि कभी-कभी यह पूरी आकाशगंगा को निगल लेते है
हमारे युग के महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने इस क्षेत्र में बहुत काम किया और हमें ब्लैक होल के बारे में बहुत अधिक जानकारी दी जिससे हम स्पेस टाइम को समझ पाते हैं दरअसल ब्लैक होल के अस्तित्व के बारे में आइंस्टीन ने भी पता लगा लिया था उनकी सापेक्षता के सिद्धांत के समीकरणों में ब्लैक होल के अस्तित्व का पता चल गया था लेकिन आइंस्टीन ब्लैकहोल को नहीं मानते थे उन्होंने किसी तरह खुद को समझा लिया था कि किसी भी तारे का द्रव्यमान उसके केंद्र की ओर संकुचित होने के लिए नहीं होता बल्कि बाहर छटकने के लिए होता है
आशा करता हूं कि आपको जानकारी दे पाया हूं

     -Mahavir(silent writer)https://amzn.to/2jeoq9e

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