कक्षा 12वीं ( एक सफर अतीत की ओर )

कक्षा 12वीं ( एक सफर अतीत की ओर)





आज मैं जब अपने  दोस्तों के साथ  कॉलेज  के पास   चाय की टपरी पर बैठ कर चाय पी रहा था तो पहली बार अहसास हुआ कि शायद टाइम मशीन बन गयी है ।

अचानक सनसनाती हुई हवा का झोंका आया और मुझे टाइम मशीन में बिठा कर  अतीत के दबे हुए  कोने पर पटक दिया ।
 इस टाइम मशीन पर रोज हज़ारो लोग सफर करते हैं और मुझे इस बात की खुशी है कि मैं अतीत के इस सफर का इकलौता यात्रि नहीं हूं ।

खैर छोड़िये अतीत की ओर चल रही यह रेलगाड़ी  मुझे वक्त में 2 साल पहले  ले गयी और इस रेलगाड़ी ने मुझे ढैला और रविन्द्र के कमरे के पास उतार दिया जहाँ  हम तीनों मैगी खा रहे थे और मैगी के साथ साथ विभिन्न विषयों पर चर्चाएं हो रही थी कभी राजनीति पर चर्चा तो कभी भगवान के बनाये इस ब्रह्मांड पर और बीच में कभी कभी JEE main जैसे गम्भीर विषय भी   चर्चा में अपना स्थान बना रहे थे ।

‌मैगी खाने के बाद हम तीनों ने सोचा कि अतीत के सफर को आगे बढ़ाया जाए और हम 2270 नम्बर वाली गाड़ी से  आगे का सफर तय करने लगे ।

‌यह गाड़ी हमें विवेकानंद इंटर कॉलेज अल्मोड़ा  12th B की 70 बच्चों वाली  कक्षा में ले गयी । आप सभी यात्रियों को बता दूं कि  12th B विवेकानंद इंटर कॉलेज अल्मोड़ा  में  विज्ञान वर्ग की कक्षा है । जहाँ इस वक़्त मनीष पवार, अमित कपिल , पवन बजेली ,विजय फर्टियाल और गौरव यादव जैसे  महारथी उत्तराखंड टॉप करने कि उम्मीद में दीपशिखा, विद्या लटवाल , गुरुदेव, भास्करानंद कांडपाल और मिश्रा जी जैसे कुशल अध्यापकों  से पढ़ रहे हैं।

‌मैं लास्ट से तीसरी बेंच आगे और 1st से चौथी बेंच पीछे अपने बेंच पार्टनर 
‌मसहूर कवि रोहित नैलवाल और देवाशीष भंडारी के साथ बैठ गया ।
‌जहां मैं और रोहित अपने चर्चाओं मैं व्यस्त हैं  और देवाशीष अपना लंच लंचब्रेक  से पहले खत्म करने की होड़ मे लगा है ।

‌जैसे ही लंचब्रेक हुआ आशीष डसीला और राहुल पंत ने भोजन मंत्र कहने के लिए कमांड बोली सभी लोग धीरे से  भोजन मंत्र बोलने लगे इस भोजन मन्त्र के बीच  सौरभ बहुगुणा की आवाज़ सबसे तेज थी ।
ब्रेक के बीच में रविन्द्र और गौरव पांडे पुरानी हिंदी कॉमेडी मूवी की बातें कर रहे थे,  देवाशीष और कमल कांडपाल coc की कभी खत्म ना होने वाली बातों में व्यस्त थे। करन नेगी ,छिमवाल और मोहित कांडपाल की कभी ना खत्म होने वाली बकचोदी जारी थी ।
ब्रेक खत्म होते ही क्लास मॉनिटर सचिन बनकोटी ने अपना कार्यक्रम स्टार्ट कर दिया था ।

सभी सबूतों और गवाहों को देखते हुए मैं इस तर्क पर पहुंचा कि
Boys स्कूल में पढ़ने का सबसे ज्यादा  दुख शायद  सुनील जोशी , ओम प्रकाश, प्रशांत भाकुनी और ललित मोहन नयाल (LMN) को था । क्योंकि इन चारों की आंखे इंटरवल के बाद श्यामपट  से हटकर विंडो से  बाहर झांक रही  थी।
क्योंकि अभी  वीरशिवा  स्कूल से आ रही कन्याओ की छुट्टी का वक़्त था ।
8th वादन आते आते हम होमवर्क की बोझ से दब चुके थे छुट्टी के बाद मैं, मेरा पुत्र पारस , रमन ,प्रियांशु सभी लोग छोटू के घर ट्यूशन क्लास लेने गए और शाम को थके हारे लेकिन मस्ती में घर पहुंचे।
अभी मैं अतीत का वह सफर कर ही रहा था कि तभी मेरे कॉलेज के नए दोस्तो ने मुझे उस टाइम मशीन से उतार दिया और अतीत का वह सफर मुझे अधूरा छोड़ना पड़ा ।
दोस्तों कालांतर के साथ सबकुछ बदल जाता है अब ना ही वह कक्षा 12वीं रही ना ही पुराने  दोस्त ।  उस अतीत के सफर को अच्छा कहूँ या बुरा समझ नही आता ।
लेकिन मेरे व्यतिगत दृष्टिकोण से शायद हम सभी को कभी-कभी ऐसे अतीत का सफर जरूर  करना चाहिये ताकि हम अपने इस भागदौड़ वाली जिंदगी को एक क्षण के लिए रोककर वो खट्टी-मीठी यादों को तरोताजा कर पाएं ।
यह मेरी कहानी थी आपकी भी अपनी कहानी होगी जिसके सहारे आप भी अतीत का सफर जरूर करते होंगे।
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-महावीर सिंह




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